उज्जैन। ज्ञात जैन इतिहास में सर्वाधिक जिन बिम्ब को सूर्यमंत्र देने और पंच कल्याणक प्रतिष्ठा कराने वाले चर्याशिरोमणि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर संसंघ के सानिध्य में पार्श्वनाथ जिनालय, नयापुरा का जीर्णोद्धार शुरु हुआ। ट्रस्टी देवेंद्र पाटनी ने बताया कि जीर्णोद्धार शिलान्यास समारोह से पहले जुलूस निकास चौराहे से शुरु हुआ। पार्श्वनाथ जिनालय नयापुरा में मूलनायक जिनेंद्र देव की शांतिधारा हुई। नारायण यादव विशेष रूप से उपस्थित थे। संचालन योगेंद्र बड़जात्या ने किया।
