उज्जैन। शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर को रात 8 बजकर 40 मिनट पर शुरु होगी और 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की किरणों में खीर रखते हैं। शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय रात में 8 बजकर 40 मिनट से है। ज्योतिर्विद प अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा और कौमुदी व्रत भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है। ज्योतिर्विद पं अजय व्यास के अनुसार मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। पं अजय व्यास ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा से मानव शरीर और मस्तिष्क को फ़ायदा होता है। पं व्यास के अनुसार भौगोलिक स्थिति कि बात करें तो रात के आकाश में चंद्रमा किसी भी अन्य वस्तु की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देता है। वास्तव में चंद्रमा का व्यास 3,475 किलोमीटर है, जो पृथ्वी के आकार का लगभग एक चौथाई है। पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा का वह भाग जो सीधे सूर्य के प्रकाश में होता है, उसे चंद्रकला कहते हैं।
