दरिद्र वो जो कड़वा बोले, स्वजनों से बैर रखे-स्वामी प्रेमानंद पुरीजी महाराज
उज्जैन। सुदामा को लोग दरिद्र कहते हैं। लेकिन सुदामा दरिद्र नहीं थे। इतने स्वाभिमानी थे कि राजा मित्र होने के बाद भी कुछ मांगा नहीं। पत्नी के कहने पर मिलने गए। जो कड़वी वाणी बोलता है भागवत में उसे दरिद्र कहा गया है। बड़े अफसोस का विषय है, आज भारत के न्यायालयों में सबसे ज्यादा मुकदमे भाई और भाई के बीच में है। यह बात बड़नगर रोड़ पर बाबा धाम मंदिर में भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरीजी ने कही। महंत आदित्य पुरी एवं आयोजक गुलाब ठाकुर ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा की पूर्णाहुति 21 सितंबर को हुई। व्यासपीठ से महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरीजी ने कहा कि आज संस्कार और संस्कृति दोनों को संभालने की जरूरत है। कभी भी कोई मंगल कार्य करो तो अपनी संस्कृति और संस्कार का ध्यान रखो। विवाह भी हमेशा वैदिक रिती से हो। इस मौके पर फूलों की होली खेली गई।

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