उज्जैन। प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था के अभा संजा लोकोत्सव में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित ने कहा-लोक जीवन में प्रकाशमान है। मुख्य अतिथि ऑस्लो नॉर्वे के सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, डॉ पूरन सहगल, डॉ मीरा सिंह, डॉ बहादुरसिंह परमार, प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, प्रो जगदीश चंद्र शर्मा, डॉ ललित सिंह, आदि ने व्याख्यान दिए। पद्मश्री डॉ राजपुरोहित ने कहा कि लोक अत्यंत व्यापक है। लोक की अनेक अंतर्धाराएं हैं। वेद परिष्कृत हैं। आज लोक संस्कृति पर व्यापक अनुसंधान की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि डॉ बहादुरसिंह परमार थे। डॉ पूरन सहगल,ने कहा कि संजा केवल चित्रांकन नहीं है वह किशोरियों के जीवन की पाठशाला है। डॉ मीरासिंह ने कहा कि संस्कारों से जुड़े लोकगीत नई पीढ़ी को सार्थक दिशा देते हैं। प्रारम्भ में स्वागत भाषण और संस्था परिचय संस्था की निदेशक डॉ पल्लवी किशन ने दिया। इस अवसर पर डॉ चिंतामणि उपाध्याय एवं डॉ भगवती लाल राजपुरोहित की पुस्तक मालवी दोहे, डॉ पूरन सहगल की पुस्तक एवं डॉ संध्या जैन की शोध कृति अत्विका की प्रस्तुति अतिथियों ने की। सत्रों का संचालन डॉ जगदीशचंद्र शर्मा एवं डॉ राम सौराष्ट्रीय ने किया। आभार डॉ सदानंदत्रिपाठी, डॉ युगेश द्विवेदी गुजरात एवं मोहन तोमर ने माना। उत्कृष्ट शोध आलेख के लिए दस शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। विभिन्न सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले अध्येताओं में डॉ संध्या सिंह, ऋतु शर्मा शुक्ला, पारस परमार, युगेश द्विवेदी, श्यामलाल चौधरी, टिंकू छेत्री, मेघालय, सुनीता जैन, शकुंतला, हरियाणा, विमल कुमार मेहता, वल्लभ विद्यानगर, अभय कुमार, वर्धा किरणबाला कराड़ा, दीपक कुमार सिंह, संगीता मिर्धा, डॉ रूपा भावसार आदि सम्मिलित थे।
