उज्जैन। प्रदेश की समस्त धार्मिक नगरियों में स्वच्छता एवं पवित्रता स्थापित करने और नदियों को पुनर्जीवित करने साथ ही उन्हें आचमन योग्य बनाने के लिए प्रदेश स्तरीय सामाजिक संस्था त्रिशूल शिव गण वाहिनी के पवित्र उद्देश्यों की पूर्ति में संत समाज सहयोग करेगा। महामंडलेश्वर ज्ञानदास दादूराम आश्रम ने कहा कि जिस प्रकार शास्त्रों में शिप्रा और उज्जयिनी की पवित्रा का उल्लेख है उसी के अनुरुप इस नगरी को पवित्र नगरी बनाए जाने के लिए और त्रिशूल शिव गण वाहिनी के सभी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हम साथ हैं। महामंडलेश्वर शांतिस्वरुपानंद, संत समिति के अध्यक्ष विशालदास एवं उपस्थित समस्त संत एवं प्रबुद्धजानों ने त्रिशूल शिव गण वाहिनी के लोगो एवं नाम का अनुमोदन किया। इसके पूर्व अभा ब्राहम्ण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी ने त्रिशूल शिव गण वहिनी के उद्देश्यों की जानकारी दी। आदित्य नागर ने बताया कि संस्था के शिप्रा शुद्धिकरण और प्रवाहमान बनाने के लिए, स्वच्छता और मांस-मदिरा तथा अन्य व्यसनों-व्यभिचार आदि से पवित्र नगरी को मुक्त कराने के लिए जन आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होने कहा कि शासकीय लोक कल्याणकारी योजनाओं में स्वच्छता, जलसंवर्धन आदि पर कार्य किया जाता है किन्तु यदि इनमें निस्वार्थ जनभागीदारी भी शामिल होती है तो अच्छे सकारात्मक परिणाम निकलते हैं।कार्यक्रम में संरक्षक जियालाल शर्मा, सुरेश मोढ, पार्षद रामेश्वर दुबे, महाकाल मंदिर समिति सदस्य राजेंद्र गुरु, विनय ओझा, पूर्व महाकाल मंदिर प्रशासक आनंदी लाल जोशी, शम्मी जोशी, हिमांशू त्रिपाठी, पियूष सनी, विशाल शर्मा, रामेश्वर जोशी, प्रहलाद गुप्ता, सुषमा सेठिया आदि उपस्थित थे ।

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