उज्जैन। हमें अपने जीवनचर्या में बदलाव करना चाहिए। बदलाव का कोई समय नहीं होता। आधुनिकरण की होड़ में हम प्लास्टिक से जुड़ गए हैं। मोटा अनाज हमारे पूर्वजों के जीवन में था। हमने चमचमाती हुई आधुनिकता में उसे छोड़ दिया। अभी भी ग्रामीण परिवेश में किसानों के परिवारों में मिट्टी के बर्तनों में भोजन पकाया और खाया जाता है। यह विचार माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ हरीश व्यास ने माधव महाविद्यालय में विश्व पृथ्वी दिवस पर वसुधा संगोष्ठी में व्यक्त किए। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ कल्पना सिंह ने की। भूगोलविद् डॉ प्रभाकर मिश्र मौजूद थे। संचालन डॉ जफर महमूद ने किया। आभार डॉ मनोज सिसोदिया ने माना। अतिथियों ने विश्व पृथ्वी दिवस पर निर्मित चित्रों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
