उज्जैन। राजवाड़ा से भिक्षावृत्ति से परेशान, बेघर, बेसहारा, सड़को पर नारकीय जीवन जीने को विवश बुजूर्ग देवव्रत चौधरी को अंकित ग्राम भेजा। एक माह बाद ज्ञात हुआ कि भिक्षुक देवव्रत पेशे से इंजीनियर है। विनोबा भावे के साथ 4 साल रहे। जब जिला प्रशासन इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को जानकारी हुई तो महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से उन्हें उनके परिजनो तक पहुंचाया। देवव्रत का कहना है जिला प्रशासन इंदौर ने मेरे अंधीयारे जीवन में प्रकाश दिया। देवव्रत ने कहा कि उन्हें ऐसे स्थल पर पहुंचाया है जहां प्रकृति का स्वर्ग है। देवव्रत ने अंगदान और देहदान का संकल्प लिया।
