उज्जैन। विशुद्द भावों से किया गया तप ही सिध्दि का साधन है। तपस्या आत्म कल्याण के लिए करो, बाह्य दिखावे के लिए नहीं। ढंग का जीवन जियो, साधना के क्षेत्र में ढोंग मत करो। यह बात आचार्य विशुद्ध सागर ने धर्मसभा में कही। प्रदीप झांझरी, शांतिकुमार कासलीवाल एवं अभिषेक विनायक ने बताया कि पाद प्रक्षालन अंबर जैन परिवार ने किया। संचालन अनिल गंगवाल ने किया। धर्मसभा में आचार्यश्री विशुध्दसागरजी ने कहा कि देश के नागरिक घर में शांति का जीवन जीते हैं, उसी समय देश के सिपाही सीमा पर सजगता के साथ खड़े रहते हैं। अपनी संतान को गाली देना नहीं सिखाना। संतान को संपत्ति के साथ अच्छे संस्कार भी दो। अतिशय क्षेत्र श्री नेमीनाथ जीनालय जयसिंहपूरा में शिलान्यास समारोह 19 मई सोमवार को होगा। दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट नमकमंडी ने समाजजनों से शामिल होने का अनुरोध किया है।
