उज्जैन। स्वर्णगिरी पर्वत की परिक्रमा नारायणा धाम के निकट स्थित गांव चिरमिया से शुरू हुई। वीर हनुमान मंदिर ग्राम आक्याधांगा, श्री राम बालाजी धाम महू, नारायणा धाम होते हुए पुनः स्वर्णगिरी धाम ग्राम चिरमिया पहुंची जहां भगवान श्री कृष्ण को पलने में बिठाकर उन्हें झूला झुलाया गया। परिक्रमा में जयपुर किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर पुष्पानंद गिरी पुष्पा माई सम्मिलित हुए। सुबह 9 बजे पुष्पा माई द्वारा स्वर्णगिरी का दुग्धाभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। अभिषेक के बाद परिक्रमा हुई। जिसमें महामंडलेश्वर पुष्पा माई भगवान बालकृष्ण को गोद में उठाकर चली। उनके साथ श्रद्धालु चल रहे थे। स्वर्णगिरी वही पर्वत है जहां से भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने लकड़िया चुनी थी। यात्रा प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को शुरू होती है। यह अवसर साल में सिर्फ एक बार आता है। वर्षा ऋतु में प्राकृतिक छटाओं से अच्छादित स्वर्णगिरी पर्वत की हरियाली और प्राकृतिक बहते झरने मन मोह रहे थे।
