उज्जैन। व्यक्ति जो संपत्ति या संपत्तियां अपने ज्ञान से अर्जित करता है, उन्हें बौद्धिक संपदा कहते हैं। बौद्धिक संपदा संरक्षण के प्रति जागरूकता आवश्यक है। उक्त विचार माधव कॉलेज में बौद्धिक संपदा अधिकार पर कार्यशाला में वक्ताओं ने व्यक्त किए। डॉ अन्यया घोषाल ने जेके रॉलिंग की विश्व प्रसिद्ध कहानी सुनाई। कार्यशाला में डॉ महेंद्र सिंघाई, डॉ सुनील गोयल, डॉ गीता दुबे, डॉ विजय कुमार सुखवानी ने बौद्धिक संपदा अधिकार पर विचार प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि डॉ शैलेंद्र भारल थे। अध्यक्षता प्रो कल्पना सिंह ने की। स्वागत वक्तव्य डॉ मंसूर खान ने दिया। संचालन डॉ जफर महमूद ने किया। आभार डॉ संगीता दुबे ने माना।
