उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर में कई वर्षों से अव्यवस्था फैली हुई हैं। मंदिर में प्रोटोकॉल के नेतागण, अधिकारी, संतों ने नियम पालन नहीं किया। मंदिर की व्यवस्थाओं पर अतिक्रमण एवं प्रोटोकॉल के नाम से निःशुल्क दर्शन से मंदिर को आर्थिक नुकसान हो रहा है। महाकाल सेना के राष्ट्रीय धर्म प्रकोष्ठ प्रमुख महेंद्र सिंह बैंस ने नए प्रशासक प्रथम कौशिक को सुझाव पत्र भेजा हैं। पत्र में उल्लेख हैं कि मंदिर प्रबंध समिति ने जो निर्णय लिए हैं वह निर्णय आम श्रद्धालु की सुविधा को ध्यान मे रखकर लिए जाते हैं लेकिन उसका उल्टा हो रहा हैं। मंदिर समिति के अधिकारी से लेकर छोटे से कर्मचारी तक रसूखदार लोगों की आव भगत में लगे रहते हैं। मंदिर धर्म स्थल हैं और यहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जलद्वार से लेकर गर्भगृह तक प्रतिबंध हैं। इसके विपरीत नेता, नेता से संबंधित रिश्तेदार या लोग, न्यायालय से संबंधित लोग, अधिकारियों के मित्र, रसूखदार व्यापारी व अन्य संगठनों के लोग सीधे गर्भगृह से बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं। महाकाल थाना, पुलिस चौकी एवं अधिकारी वर्ग को परिवार सहित गर्भगृह की देहली और नंदी हॉल से निःशुल्क वीआईपी दर्शन की छूट दी गई हैं क्या ?यह भी स्पष्ट होना चाहिए यदि ऐसे आदेश है तो कृपया अवगत कराने की कृपा करें। महाकाल सेना, प्रशासक और मंदिर समिति से अपेक्षा करती हैं कि शीघ्र ही उपरोक्त विषयों के संबंध में सख्त आदेश जारी होंगे।
