उज्जैन। बाबा जयगुरुदेव आश्रम पर चल रही तीन दिवसीय आध्यात्मिक होली के प्रथम दिन सत्संग सुनाते हुए वक़्त संत बाबा उमाकांत ने कहा कि अपने शरीर, बच्चों, देश-दुनिया को बचाने के लिए सुमिरन, ध्यान, भजन को प्राथमिकता दो। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है, शरीर बूढ़ा हो गया है और अब पहले जैसा साथ नहीं दे रहा है। लेकिन उन्होंने प्रेमियों से आग्रह किया कि जो सत्संग पहले सुनाया गया है, उसे नए लोग ध्यान से सुनने और समझने का प्रयास करें। महाराज ने कहा कि जो प्रेमी पहले से सत्संग सुनते आ रहे हैं, वे इसे दूसरों को भी सुनाएं। शरीर को स्वस्थ रखना आवश्यक है ताकि मन विचलित न हो। उन्होंने प्रेमियों से आग्रह किया कि वे उन लोगों से मिलें जो पहले से सन्तमत को समझते हैं।
