उज्जैन। ईश्वर अपनी इच्छा को हमारे द्वारा पूरा करना चाहते हैं। शिव के अनन्य भक्तों-साधकों की दृष्टि में महाशिवरात्रि अपने इष्ट को प्रसन्न करने का अवसर है। इस दिन किया गया जप, तप, उपासना, ध्यान, व्रत, उपवास, कीर्तन सब कुछ त्वरित फलदायी होते हैं। ज्ञान में तत्वमसि की सिद्धि का मार्ग यद्यपि दुर्गम है, परंतु जिन्होंने इंद्रियों को वश में कर लिया हो ऐसे योगी-ज्ञानीजन के जीवन में शिव तत्व साकार हो जाता है। शिव जगतगुरु है। शिव नित्य है। उनका कोई जन्म प्रसंग नहीं है। अभा सामाजिक व आध्यात्मिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति ने महाशिवरात्रि पर आध्यात्मिक सत्संग समारोह किया। सतपालजी महाराज की शिष्या रेणुका ने यह संदेश दिया। महात्मा श्री हर्षानंद, साध्वी शारदा व सेविका सरिता बहन ने शिव- पार्वती विवाह गीत व ज्ञान-भक्ति, वैराग्य से ओतप्रोत भजनों  के माध्यम आत्म कल्याणकारी सत्संग विचार रखें। समिति सदस्यों ने संतों का स्वागत किया। संचालन जगन्नाथ शर्मा ने किया।आभार पुरुषोत्तम वैरागी ने माना।

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