उज्जैन। विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर विक्रम विवि के कुलगुरु प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि आर्द्रभूमियां प्राकृतिक संसाधनों के रूप में मानव जीवन हेतु सदैव अत्यधिक मूल्यवान हैं। यह जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और पानी को शुद्ध करने का काम भी करती हैं। पिछले 3सौ वर्षों में दुनिया की 87 प्रतिशत आर्द्रभूमि नष्ट हो चुकी है। मानव आबादी के लिए इनका बहुत महत्व है। प्रो. अर्पण भारद्वाज ने विक्रम विवि के पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान एवं कैंपस आउटरीच आरयुविवि के सहभागियों को इस संदर्भ में जानकारी दी। प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता ने वहां के आरयु विद्यार्थियों से स्वर्णप्रस्थ स्थलीय क्षेत्र में चर्चा की। उन्होंने कदलुर झील (तमिलनाडु), डबके तड़का (महाराष्ट्र) और भारतीय सुंदरवन (पश्चिम बंगाल) जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण स्थल माना। विद्यार्थियों कनिष्का शर्मा, मेहा शर्मा, रितिका राय और अक्षिता झा ने राष्ट्रीय स्तर के अंग्रेजी मीडिया समूह की ड्राइंग-पेंटिंग प्रतियोगिता में भी भाग लिया।

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