उज्जैन। धार्मिक व्यक्ति के अंदर धर्म के लक्षण भी दिखना चाहिए। धार्मिक व्यक्ति निर्भय होता है। जो भगवान की शरण में आता है, भगवान उसका कल्याण करते हैं। ध्रुवजी के प्रसंग में यह समझाया गया। ज्ञान भक्ति, तपस्या, यज्ञ, अनुष्ठान उसी का सफल है जो समाज, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण के लिए अपनी शक्ति व धन को लगाता है। दक्ष प्रजापति की कथा में यही समझाया गया। डॉ. गोस्वामी श्री बृजोत्सवजी ने यह बात कहीं। मीडिया प्रभारी दीपक राजवानी के अनुसार कथा में अजामिल भरत की कथा सुनाई। गिरिराज पर्वत उंगली पर उठाते हुए धर्म के लक्षण दया, मंत्र करूण बताए। विट्ठल नागर, धर्मेंद्र गुप्ता, राजेश गुप्ता ने भी आरती की। कथा में द्वारकादास नीमा, जीवनलाल दिसावल, अशोक जड़िया, रसिक सुगंधी, बंशीलाल नीमा, शरद भट्ट आदि मौजूद थे।
