उज्जैन। इस दुनिया में ज्ञान के समान पवित्र और कुछ नहीं है। श्रीमद्भगवद् गीता में दर्ज इस पंक्ति की सार्थकता को व्यापक रूप देने के लिए प्रयाग कुंभ में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा ज्ञान महाकुंभ किया। ज्ञान महाकुंभ में भारतीय शिक्षा : राष्ट्रीय संकल्पना पर 3 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला हुई। इसके शुभारंभ में न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि इस अलौकिक महाकुंभ में ज्ञान महाकुंभ अद्भुत संयोग है। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सर कार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा हमारी ज्ञान परंपरा में एकांगी शिक्षा नहीं दी जाती थी, परंतु आज संपूर्ण विश्व एकांगी शिक्षा व्यवस्था से ग्रसित है। विशिष्ट अतिथि यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की सराहना की। स्वागत भाषण कर्तव्य न्यास राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ पंकज मित्तल ने दिया। आभार संजय स्वामी ने माना। आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक डॉ मुकुल सुतावणे विशेष रूप से उपस्थित थे। यह जानकारी देते हुए न्यास के क्षेत्रीय संयोजक प्रचार प्रसार डॉ जफर महमूद ने बताया कि ज्ञान महाकुंभ में विक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के दो दलों ने भाग लिया। दल प्रबंधक के रूप में डॉ अजय शर्मा, डॉ प्रमिता सिंह एवं प्रो द्वारिका जायसवाल ने प्रतिनिधित्व किया।
