उज्जैन। ऋगवेद भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रथम ग्रंथ है । यह सभी प्रकार के अज्ञान का निवारण करता है। भारतीय पुराण ज्ञान के विश्वकोश हैं। पाणिनि की अष्टाध्यायी, पतंजलि के महाभाष्य, भरत के नाट्यशास्त्र, कालिदास और वराहमिहिर के साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के बहुत से उद्धरण मिलते हैं। यह उद्गार माधवकॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की भारतीय ज्ञान परंपरा : विविध सन्दर्भ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित ने व्यक्त किए। अतिथि डॉ अर्पण भारद्वाज थे। माधव कॉलेज जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष बुद्ध सिंह सेंगर विशेष अतिथि थे। संगोष्ठी में डॉ वन्दना गुप्ता मौजूद थी। डॉ कल्पना सिंह ने अध्यक्षीय भाषण दिया। संगोष्ठी संयोजक डॉ शोभा मिश्र ने स्वागत वक्तव्य दिया । जनभागीदारी समिति सदस्य डॉ भारती वर्मा और संजीव खोईवाल भी उपस्थित थे। सरस्वती वंदना डॉ नलिनी तिलकर ने की।अतिथियों का स्वागत डॉ अंशु भारद्वाज, डॉ मोहन निमोले और डॉ दिनेश जोशी ने किया । संचालन डॉ जफर महमूद ने किया । आभार डॉ अल्पना दुभाषे ने माना। जानकारी डॉ रवि मिश्र ने दी।
