उज्जैन। मध्यप्रदेश शासन के अव्यवहारिक निर्णयों से नागझिरी पर एशिया के सबसे बड़े सोयाबीन प्लांट को बंद कर उसके 248 कर्मचारियों को आज तक वेतन भुगतान नहीं किया है और उन्हें बेरोजगार कर दिया गया। लंबे समय से त्रस्त अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तीन दिन पहले कीर्ति रावल के नेतृत्व में सोयाबीन प्लांट के कर्मचारियों का चार सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिला था। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की समस्याएं सुनकर शीघ्र समाधान के लिए आश्वस्त किया है। राष्ट्रीय तिलहन विकास योजना में प्रदेश शासन और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड आणंद के बीच हुए करार के अनुसार नागझिरी में एशिया के सबसे बड़े 4 सौ मेट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का सोयाबीन संयत्र लगाया गया। शासन व डेरी बोर्ड के करार के अनुसार यह संयत्र क्षेत्रीय तिलहन संघ के सुपुर्द करना था। लेकिन अपरिहार्य कारणों से ऐसा नहीं हो पाया।।
जनवरी 1994 में प्रदेश शासन व एनडीडीबी के जिम्मेदारों के बीच बैठक में निर्णय लिया गया था कि क्षेत्रीय संघ का तिलहन संघ भोपाल में विलय करते हुए उसके समस्त दायित्व और संपत्तियां तिलहन संघ को सौंप दी जाए। क्षेत्रीय संघ के कर्मचारियों की सेवाओं का तिलहन संघ में संविलियन कर दिया जाए। खेद है कि बैठक में लिए गए निर्णयों का क्रियान्वयन नहीं हो पाया।मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही कर्मचारियों के हित में निर्णय कर उनके बकाया वेतन आदि का भुगतान किया जायगा।

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