उज्जैन।। भगवान नेमिनाथ को वैराग्य के पहले शादी के लिए बारात निकलने के प्रसंग पर दुर्लभमति माताजी ने कहा कि भगवान नेमिकुमार और कृष्ण भगवान चचेरे भाई थे। उनकी बारात में लाखों यदुवंशी सम्मिलित हुए। भगवान नेमिनाथ को एकदम वैराग्य हो गया और उन्होंने संसार के सभी एसोआराम छोड़कर दिगंबर मुनि से दीक्षा ले ली। वे जैनों के 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ कहलाए। क्षमाश्री माताजी ने कहा कि इस दुनिया में सबसे सस्ता यदि कुछ है तो सलाह देना। समाज सचिव सचिन कासलीवाल एवं मंदिर सचिव सुशील लुहाडिया ने बताया कि दुर्लभमति माताजी ससंघ पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर फ्रीगंज से शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लक्ष्मी नगर पहुंची। बालक नेमीकुमार की गोद भराई शांतिनाथ दिगंबर मंदिर लक्ष्मी नगर सेठी नगर में हुई। कासलीवाल ने बताया कि चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अमितेश-निवेदिता, अनिल-रानी लुहाड़िया, सुनील-ममताजी, रौनकजी आदि एवं अन्य परिवारों  डा.पदमचंद, मनीष जैन, सुशील-नीलम लुहाड़िया, प्रसन्न-स्वपनेश शाह झालरापाटन, सचिन-सपना जैन सेठीनगर, प्रदीप-कीर्ति पांड्या, प्रो. देवेंद्र – विभा गोधा अशोक विहार ,श्रीमती अंजनाजी पुत्र अमित जी जैन, सुदर्शन -साधना जैन, दिवाकर-तनुजा जैन, अजय-रानी जैन, अमृता पुत्र जितेंद्र जैन, संतोष-सुधा जैन, सुलोचना पुत्र विवेक जैन, सुनील-सुषमा पाटनी, शंभू कुमार अमित सेठी, लोकेश-निलज छाबड़ा, अशोक-रंजना जैन,आरके जैन-विजया जैन, पारस-सोनम जैन, भरत नीलम पांड्या, सुशील-कविता गंगवाल आदि मौजूद थे।

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