समस्त जीव शक्ति को अभय दान देने की प्रेरणा देता है पर्युषण पर्व – साध्वी डॉ. नीलांजना

उज्जैन।र्युषण पर्व के अवसर पर शांतिनाथ मंदिर छोटा सराफा में साध्वी डॉ. नीलांजना श्री जी ने कहा कि आज पर्यूषण का द्वितीय मंगल प्रभात हमारे जीवन में कषायों का जहर क्षमा की अमृत धारा में बदलने आया है जीवन में समता की चांदनी बिखरने वाला, सरलता ऋतुजा की मंदाकिनी में अभी स्नान करने का पर्व है पर्यूषण । हृदय में छाया मिथ्यात्व का घोर अंधकार मिटा कर सम्मक्तव का दीप जलाने आया है   पर्युषण यह हमें जीवन जीने की सच्ची दृष्टि प्रदान करता है
भगवान महावीर ने अहिंसा को जीवन का रसायन कहकर उसकी सुषमा व्याख्या की है किसी को मारना तो हिंसा है ही परंतु किसी को मानसिक कष्ट देना भी हिंसा है भारत धर्म प्राण देश है परंतु वर्तमान की विलासप्रियता एवं स्वार्थी मानसिकता ने प्रकृति को विनाश के कगार तक पहुंचा दिया है मानव इस धरती पर प्रेम का अमृत भी बांट सकता है तो क्रोध कषाय आतंक का जहर भी। हमारे जीवन शैली फूल जैसी हो जो सौंदर्य  सुगंध और कोमलता देता है
पर्युषण के दिनों में हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम मानवता से परिपूर्ण बने हमारा आचरण जैनत्व के संस्कारों से सुवासित बने इसी क्रम में साध्वी श्री से ने  पर्युषण  के पांच कर्तव्यों  की विस्तृत व्याख्या की।

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