उज्जैन। जीवन में उत्कर्ष प्राप्त करना है तो धैर्य नहीं छोड़ना। कितने भी संकट आएं, कितनी भी विपत्ति-पीड़ा हो परंतु धैर्य नहीं छोड़ना। धैर्यशाली मानव की विपत्ति भी संपत्ति के रूप में फलित होती है। धैर्य के बिना धन नहीं मिलता। यह बात आचार्यश्री विशुद्ध सागर ने धर्मसभा में कही। संजय जैन दादा एवं चेतन राणा ने बताया कि आचार्यश्री ने कहा कि जीवन ऐसा जियो कि दुनिया तुम्हें देखकर मुस्कुराए। जीना आपका अधिकार है तो दूसरों को जीने देना तुम्हारा कर्तव्य है। किसी पर सरस्वती प्रसन्न होती है, किसी पर लक्ष्मी। सबके दिन एक से नहीं होते हैं।
