उज्जैन। शिक्षक राष्ट्र की शैक्षणिक वाटिका के चतुर माली होते है। शिक्षक अभावों मे भी रहकर प्रतिभावान शिष्यों की टोली तैयार करता है। शिक्षक और सिपाही को छड़ी लौटा दें तो पीढ़ियां सुधर जाएंगी। उक्त विचार प्रधानाचार्य शैलेंद्र व्यास (स्वामी मुस्कुराके) ने सेवा निवृत शिक्षिका मंजुला कुशवाह के बिदाई अवसर पर व्यक्त किए। मुख्य अतिथि अमित श्रीवास्तव थे। विशेष अतिथि प्रदीप सिंह जादोन थे। शाब्दिक स्वागत राकेश जोशी ने किया। अभिनंदन पत्र का वाचन सीमा शर्मा ने किया। संचालन पुरुषोत्तम विष्णु ने किया। आभार सीमा सिसोदिया ने माना। सरस्वती वंदना पल्लवी श्रीवास्तव ने प्रस्तुत की। सेवा निवृत शिक्षिका मंजुला कुशवाह का विशिष्ट अभिनंदन लता शिंदे, मनीषा गुप्ता, ममता मिश्रा, संजय अष्ठाना, भारती गोमे ने किया।
